अमरीकी कांग्रेस में हुई एक लंबी सुनवाई में अमरीकी नेताओं ने कश्मीर को लेकर भारत के रुख की आलोचना की है.
अमरीकी कांग्रेस में मंगलवार को दक्षिण एशिया क्षेत्र के मानवाधिकारों पर हुई चर्चा के दौरान कश्मीर का मुद्दा ही हावी रहा.
अमरीकी संसदीय समिति ने अमरीकी सरकार की ओर से पेश अधिकारियों के अलावा कश्मीर मुद्दे पर स्थानीय गवाहों की बात भी सुनी.
दक्षिण एशिया मामलों की सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने समिति के समक्ष कहा कि अमरीका ने कश्मीर के हालात को लेकर अपनी चिंता से भारत को अवगत कराया है.
उन्होंने कहा, "विभाग ने भारत को सैकड़ों लोगों और जम्मू कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई नेताओं को लगातार हिरासत में रखे जाने को लेकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है. हमने भारतीय अधिकारियों से इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने की अपील की है और जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है."
वेल्स ने कहा, "अमरीका कश्मीरी लोगों के शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का समर्थन करता है लेकिन उन लोगों की आलोचना करता है जो बातचीत को कमज़ोर करने के लिए हिंसा और डर का इस्तेमाल करते हैं."
एलिस वेल्स ने ये भी कहा कि कश्मीर से 'अनुच्छेद 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला है' लेकिन उनकी चिंता यहां हो रहे 'मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर है'.
अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों ने सुनवाई के दौरान विदेशी पत्रकारों, विदेशी राजनयिकों और अधिकारियों के कश्मीर में जाने पर रोक के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि इस वजह से यहां से सही सूचनाएं भी नहीं मिल पा रही हैं.
इस सुनवाई के दौरान पाकिस्तान की भी अपनी ज़मीन से आतंकवाद को समाप्त न करने को लेकर आलोचना की गई लेकिन अधिकतर अमरीकी अधिकारियों के सवाल भारत पर ही केंद्रित रहे.
उप-समिति के चेयर ब्रेट शर्मन ने सवाल किया, "क्या हम भारत सरकार के अधिकारियों का भरोसा कर सकते हैं जब भारत सरकार हमारे राजनयिकों को वहां जाकर हालात का जायज़ा लेने से ही रोक रही है?"
इस सवाल के जवाब में वेल्स ने कहा कि अमरीकी अधिकारी कश्मीर के बारे में जानकारी के लिए भारतीय अधिकारियों पर ही निर्भर हैं.
वहीं समिति के समक्ष अपनी बात रखते हुए शिक्षाविद और लेखिका निताशा कौल ने भारत के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, "यहां मूल सवाल लोगों की मर्ज़ी का है. अगर कोई क़दम लोगों के कल्याण और विकास के लिए उठाया गया है तो फिर दसियों हज़ार सैनिकों को बुलाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?"
निताशा ने कहा, "क्यों ये फ़ैसला लोगों की कोई भी राय लिए बिना अचानक किया गया, यहां तक की भारत समर्थक नेताओं तक को जेल में डाल दिया गया. जनता को राय ज़ाहिर करने के अधिकार से पूरी तरह वंचित कर दिया गया, अगर ये उनके भले के लिए हैं तो फिर उनमें से किसी को इस बारे में कुछ भी बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा है?
No comments:
Post a Comment